Friday, May 7, 2010

एक ज़मींदार खानदान और बड़े व्यापारिक ,नामवर घराने से होना किसी के लिए भी शान की बात है लेकिन प्रतिष्ठा जब लकीरें खीचती है कार्य के बीच में, कर्म के प्रकार के बीच में ,जब आपके आगे और पीछे चलने वाला,वो बड़ा सा नाम जो वजह है गर्व से ऊँचे हुए आपके मस्तक की,जो कारण है, अहंकार से चौड़ी हुई आपकी छाती की,जिसकी वजह से आपकी चाल का मद लोगो को ठिठकने पर मजबूर कर देता है, जिस शान का नशा आपकी आँखों को औरो को खुद से छोटा या कमतर देखने के लिए उकसाता है, वही शान ,वही बड़ा सा नाम जब सिर्फ आपके लिए किसी काम को छोटा या बड़ा बनाता है,तो यही प्रतिष्ठा का प्याला ,जिसकी चुस्कियां, रंगीनिया बेखेरती थी,एक ऐसा कडुवा घूंट मालूम चलता है,जिसे न पिया ही जा सकता है और न फेंका जा सके.

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