अद्ध्याय-२
वर्षा
रोहिणी बरसै मृग तपै, कछु कछु अद्रा जाए।
कहैं घाघ सुनु घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय॥
यदि रोहिणी बरसे,मृगशिरा तपे और आद्रा में सामान्य वर्षा हो जाय तो इतना धान पैदा होता है की कुत्ते भी भात नहींखाएँगे। मतलब भात खाते-खाते ऊब जाएँगे।
Tuesday, June 29, 2010
Monday, June 28, 2010
Saturday, June 26, 2010
घाघ-भड्डरी .........
असुनी नलिया अंत विनासै, गली रेवती जल को नासै।
भरनी नासै तृनौ सहूतो, कृतिका बरसै अंत बहूतो॥
यदि चैत मास में आश्विन नक्षत्र बरसे तो वर्षा ऋतु के अंत में सूखा पड़ेगा। रेवती नक्षत्र में बरसे नाम मात्र को वर्षाहोगी, भरणी नक्षत्र बरसे तो घास भी सूख जाऐगी। और यदि कृतिका नक्षत्र बरसे तो वर्षा अच्छी होगी।
असुनी नलिया अंत विनासै, गली रेवती जल को नासै।
भरनी नासै तृनौ सहूतो, कृतिका बरसै अंत बहूतो॥
यदि चैत मास में आश्विन नक्षत्र बरसे तो वर्षा ऋतु के अंत में सूखा पड़ेगा। रेवती नक्षत्र में बरसे नाम मात्र को वर्षाहोगी, भरणी नक्षत्र बरसे तो घास भी सूख जाऐगी। और यदि कृतिका नक्षत्र बरसे तो वर्षा अच्छी होगी।
Wednesday, June 16, 2010
घाघ भड्डरी..........................आज की कहावत...
अखै तीज तिथि के दिन, गुरु होवै सजूत।
तो भाखै यों भड्डरी, उपजै नाज बहूत॥
यदि वैशाख में अक्षय तृतीया को गुरुवार हो तो भड्डरी कहती है की समझ लेना चाहिए की खूब अन्न पैदा होगा।
सावन सुक्ला सप्तमी, जो गरजै अधिरात।
बरसै तो झूरा परै, नाहीं समौ सुकाल॥
यदि सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को आधी रात के समय बादल गरजे और पानी बरसे तो सुखा पड़ेगा और बादल तो गरजे लेकिन पानी न बरसे तो समझ लेना चाहिए की सुकाल रहेगा।
अखै तीज तिथि के दिन, गुरु होवै सजूत।
तो भाखै यों भड्डरी, उपजै नाज बहूत॥
यदि वैशाख में अक्षय तृतीया को गुरुवार हो तो भड्डरी कहती है की समझ लेना चाहिए की खूब अन्न पैदा होगा।
सावन सुक्ला सप्तमी, जो गरजै अधिरात।
बरसै तो झूरा परै, नाहीं समौ सुकाल॥
यदि सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को आधी रात के समय बादल गरजे और पानी बरसे तो सुखा पड़ेगा और बादल तो गरजे लेकिन पानी न बरसे तो समझ लेना चाहिए की सुकाल रहेगा।
Tuesday, June 15, 2010
Monday, June 14, 2010
Sunday, June 13, 2010
Saturday, June 12, 2010
घाघ-भड्डरी कल से आगे.....................
श्रीमती शांति देवी और श्री देश कुमार शुक्ल के कनिष्ठ पुत्र श्री प्रमोद कुमार शुक्ल जी ने भी इन कहावतो के संकलन में बहुत महतवपूर्ण योगदान दिया है। मै आप सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ।
अब हम उसी क्रम में, इन कहावतो में प्रवेश करेंगे ,जो श्री देव नारायण जी ने अपनी पुस्तक में दियाहै।
प्रथम अद्ध्याय सुकाल और अकाल
सर्व तपै जो रोहिणी,सर्व तपै जो मूर।
परिवा तपै जो जेठ की,उपजै सातों तूर।
यदि रोहिणी (एक नक्षत्र है)भर पूरा तपे और मूल भी पूरा तपे (तपने का अर्थ गर्मी पड़ने से है)तथाजेठ(हिंदी का एक महीना है)की प्रतिपदा(महीने की पहली तिथि)भी तपे तो सातों प्रकार के अन्न पैदा होंगे। मतलब खूब पैदावार होगी।
शुक्रवार की बादरी,रही सनीचर छाय।
तो यों भाखै भड्डरी,बिन बरसे ना जाय।
यदि शुक्रवार को बादल और शनिवार को छाया रहे तो भड्डरी कहती है कि बारिश होना निश्चित है।
भादों कि छट चांदनी,जो अनुराधा होय।
उबड़ खाबड़ बोय दे, अन्न घनेरा होय॥
यदि भादों(हिंदी का महीना)की शुक्ल पक्ष(वो १५ दिन,जिनमे चाँद बढ़ता है)की छट को अनुराधा नक्षत्रपड़े तो उबड़ खाबड़(जो जमीन समतल ना हो और जिसपर खेती ना की जा सकती हो)जमीन में भी उसदिन यदि बुआई कर दी जाय, तो घना अन्न पैदा होगा(अर्थात बहुत पैदावार होगी)।
आज के लिए इतना ही......
श्रीमती शांति देवी और श्री देश कुमार शुक्ल के कनिष्ठ पुत्र श्री प्रमोद कुमार शुक्ल जी ने भी इन कहावतो के संकलन में बहुत महतवपूर्ण योगदान दिया है। मै आप सभी के प्रति अपना आभार व्यक्त करता हूँ।
अब हम उसी क्रम में, इन कहावतो में प्रवेश करेंगे ,जो श्री देव नारायण जी ने अपनी पुस्तक में दियाहै।
प्रथम अद्ध्याय सुकाल और अकाल
सर्व तपै जो रोहिणी,सर्व तपै जो मूर।
परिवा तपै जो जेठ की,उपजै सातों तूर।
यदि रोहिणी (एक नक्षत्र है)भर पूरा तपे और मूल भी पूरा तपे (तपने का अर्थ गर्मी पड़ने से है)तथाजेठ(हिंदी का एक महीना है)की प्रतिपदा(महीने की पहली तिथि)भी तपे तो सातों प्रकार के अन्न पैदा होंगे। मतलब खूब पैदावार होगी।
शुक्रवार की बादरी,रही सनीचर छाय।
तो यों भाखै भड्डरी,बिन बरसे ना जाय।
यदि शुक्रवार को बादल और शनिवार को छाया रहे तो भड्डरी कहती है कि बारिश होना निश्चित है।
भादों कि छट चांदनी,जो अनुराधा होय।
उबड़ खाबड़ बोय दे, अन्न घनेरा होय॥
यदि भादों(हिंदी का महीना)की शुक्ल पक्ष(वो १५ दिन,जिनमे चाँद बढ़ता है)की छट को अनुराधा नक्षत्रपड़े तो उबड़ खाबड़(जो जमीन समतल ना हो और जिसपर खेती ना की जा सकती हो)जमीन में भी उसदिन यदि बुआई कर दी जाय, तो घना अन्न पैदा होगा(अर्थात बहुत पैदावार होगी)।
आज के लिए इतना ही......
घाघ-भड्डरी की कहावते
मै उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद का रहने वाला हूँ। वैसे तो घाघ-भड्डरी की कहावते पूरे उत्तर भारत में कही जाती है लेकिन हमारे जनपद में,ये कहावते जन- जन की जुबान पर रहती है। हमारे यहाँ बैसवारा क्षेत्र के लोगो की बोल-चाल का अभिन्न अंग है ये कहावते। इसका एक कारण शायद ये भी है की, ये क्षेत्र घाघ-भड्डरी का ही स्थान माना जाता है। इस सम्बन्ध में अनेक मत है ,जिनमे प्रवेश करना ठीक नहीं होगा क्यों कि ये विवाद को निमंत्रित करने जैसा होगा। और हम तो यहाँ संवाद स्थापित करने के लिए आए है। एक और बात को लेकर लोगो में मतान्तर है कि ,घाघ-भड्डरी एक ही व्यक्ति है या ये दो अलग लोगो के नाम है। हमारे यहाँ माना जाता है कि,घाघ नाम के आदमी कि पत्नी थी भड्डरी। ये भी कहा जाता है कि, भड्डरी, घाघ से अधिक कुशाग्र और परिस्थितिओं को अधिक गहराई से देखने, समझने और कहने में माहिर थी। जो भी हो वो शोध का विषय है, हम यहाँ उन दुर्लभ, बहुमूल्य और अचूक कहावतो को संजोने और अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने के मंशा रखते है।
एक बात और कहना चाहता हूँ । वैसे तो कुछ संकलन मेरे पास भी था किन्तु बहुत सारी कहावते मुझे एक पुस्तक में मिली जो कि श्री देव नारायण द्विवेदी जी के अथक परिश्रम और शोध के फलस्वरूप बुक स्टोर्स में उपलब्ध है। मै ह्रदय से, पूरी विनम्रता और आदर के साथ परम आदरणीय श्री देव नारायण जी को धन्यवाद करता हुआ उनके चरणों में वंदन करता हूँ।
मुझे इन कहावते की सबसे पहले विस्तृत जानकारी जिनसे मिली, वो है मेरे बाबा तुल्य श्री देश कुमार शुक्ल जी, पूर्व प्राचार्य कमला पति इंटर कॉलेज, बीघापुर उन्नाव एवं उनकी पत्नी और मेरी परम आदरणीय दादी श्रीमतीशांति देवी जी, जिनका नाम लिए बिना मै ये कार्य शुरू ही नहीं कर सकता हूँ।
मै उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद का रहने वाला हूँ। वैसे तो घाघ-भड्डरी की कहावते पूरे उत्तर भारत में कही जाती है लेकिन हमारे जनपद में,ये कहावते जन- जन की जुबान पर रहती है। हमारे यहाँ बैसवारा क्षेत्र के लोगो की बोल-चाल का अभिन्न अंग है ये कहावते। इसका एक कारण शायद ये भी है की, ये क्षेत्र घाघ-भड्डरी का ही स्थान माना जाता है। इस सम्बन्ध में अनेक मत है ,जिनमे प्रवेश करना ठीक नहीं होगा क्यों कि ये विवाद को निमंत्रित करने जैसा होगा। और हम तो यहाँ संवाद स्थापित करने के लिए आए है। एक और बात को लेकर लोगो में मतान्तर है कि ,घाघ-भड्डरी एक ही व्यक्ति है या ये दो अलग लोगो के नाम है। हमारे यहाँ माना जाता है कि,घाघ नाम के आदमी कि पत्नी थी भड्डरी। ये भी कहा जाता है कि, भड्डरी, घाघ से अधिक कुशाग्र और परिस्थितिओं को अधिक गहराई से देखने, समझने और कहने में माहिर थी। जो भी हो वो शोध का विषय है, हम यहाँ उन दुर्लभ, बहुमूल्य और अचूक कहावतो को संजोने और अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने के मंशा रखते है।
एक बात और कहना चाहता हूँ । वैसे तो कुछ संकलन मेरे पास भी था किन्तु बहुत सारी कहावते मुझे एक पुस्तक में मिली जो कि श्री देव नारायण द्विवेदी जी के अथक परिश्रम और शोध के फलस्वरूप बुक स्टोर्स में उपलब्ध है। मै ह्रदय से, पूरी विनम्रता और आदर के साथ परम आदरणीय श्री देव नारायण जी को धन्यवाद करता हुआ उनके चरणों में वंदन करता हूँ।
मुझे इन कहावते की सबसे पहले विस्तृत जानकारी जिनसे मिली, वो है मेरे बाबा तुल्य श्री देश कुमार शुक्ल जी, पूर्व प्राचार्य कमला पति इंटर कॉलेज, बीघापुर उन्नाव एवं उनकी पत्नी और मेरी परम आदरणीय दादी श्रीमतीशांति देवी जी, जिनका नाम लिए बिना मै ये कार्य शुरू ही नहीं कर सकता हूँ।
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