अद्ध्याय-२
वर्षा
रोहिणी बरसै मृग तपै, कछु कछु अद्रा जाए।
कहैं घाघ सुनु घाघिनी, स्वान भात नहीं खाय॥
यदि रोहिणी बरसे,मृगशिरा तपे और आद्रा में सामान्य वर्षा हो जाय तो इतना धान पैदा होता है की कुत्ते भी भात नहींखाएँगे। मतलब भात खाते-खाते ऊब जाएँगे।
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