Saturday, June 12, 2010

घाघ-भड्डरी की कहावते
मै उत्तर प्रदेश के उन्नाव जनपद का रहने वाला हूँ वैसे तो घाघ-भड्डरी की कहावते पूरे उत्तर भारत में कही जाती है लेकिन हमारे जनपद में,ये कहावते जन- जन की जुबान पर रहती है हमारे यहाँ बैसवारा क्षेत्र के लोगो की बोल-चाल का अभिन्न अंग है ये कहावते इसका एक कारण शायद ये भी है की, ये क्षेत्र घाघ-भड्डरी का ही स्थान माना जाता है इस सम्बन्ध में अनेक मत है ,जिनमे प्रवेश करना ठीक नहीं होगा क्यों कि ये विवाद को निमंत्रित करने जैसा होगा और हम तो यहाँ संवाद स्थापित करने के लिए आए है एक और बात को लेकर लोगो में मतान्तर है कि ,घाघ-भड्डरी एक ही व्यक्ति है या ये दो अलग लोगो के नाम है हमारे यहाँ माना जाता है कि,घाघ नाम के आदमी कि पत्नी थी भड्डरी ये भी कहा जाता है कि, भड्डरी, घाघ से अधिक कुशाग्र और परिस्थितिओं को अधिक गहराई से देखने, समझने और कहने में माहिर थी जो भी हो वो शोध का विषय है, हम यहाँ उन दुर्लभ, बहुमूल्य और अचूक कहावतो को संजोने और अधिक से अधिक लोगो तक पहुचाने के मंशा रखते है
एक बात और कहना चाहता हूँ वैसे तो कुछ संकलन मेरे पास भी था किन्तु बहुत सारी कहावते मुझे एक पुस्तक में मिली जो कि श्री देव नारायण द्विवेदी जी के अथक परिश्रम और शोध के फलस्वरूप बुक स्टोर्स में उपलब्ध है मै ह्रदय से, पूरी विनम्रता और आदर के साथ परम आदरणीय श्री देव नारायण जी को धन्यवाद करता हुआ उनके चरणों में वंदन करता हूँ
मुझे इन कहावते की सबसे पहले विस्तृत जानकारी जिनसे मिली, वो है मेरे बाबा तुल्य श्री देश कुमार शुक्ल जी, पूर्व प्राचार्य कमला पति इंटर कॉलेज, बीघापुर उन्नाव एवं उनकी पत्नी और मेरी परम आदरणीय दादी श्रीमतीशांति देवी जी, जिनका नाम लिए बिना मै ये कार्य शुरू ही नहीं कर सकता हूँ

No comments:

Post a Comment