swaadheen
Sunday, June 13, 2010
घाघ
-
भड्डरी
की
कहावते
-
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......................
अद्रा
भद्रा
कृत्तिका
,
आद्र
रेख
जुमवाहि
।
चंदा
उगै
दूज
को
,
सुख
से
नरा
अघाहिं
॥
यदि
द्वितीया
का
चन्द्रमा
आद्रा
,
कृत्तिका
,
श्लेषा
या
मघा
नक्षत्र
अथवा
भद्रा
में
उगे
तो
मनुष्य
सुखी
रहेंगे।
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