Saturday, June 26, 2010

घाघ-भड्डरी .........

असुनी नलिया अंत विनासै, गली रेवती जल को नासै
भरनी नासै तृनौ सहूतो, कृतिका बरसै अंत बहूतो

यदि चैत मास में आश्विन नक्षत्र बरसे तो वर्षा ऋतु के अंत में सूखा पड़ेगारेवती नक्षत्र में बरसे नाम मात्र को वर्षाहोगी, भरणी नक्षत्र बरसे तो घास भी सूख जाऐगीऔर यदि कृतिका नक्षत्र बरसे तो वर्षा अच्छी होगी

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