घाघ भड्डरी..........................आज की कहावत...
अखै तीज तिथि के दिन, गुरु होवै सजूत।
तो भाखै यों भड्डरी, उपजै नाज बहूत॥
यदि वैशाख में अक्षय तृतीया को गुरुवार हो तो भड्डरी कहती है की समझ लेना चाहिए की खूब अन्न पैदा होगा।
सावन सुक्ला सप्तमी, जो गरजै अधिरात।
बरसै तो झूरा परै, नाहीं समौ सुकाल॥
यदि सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी को आधी रात के समय बादल गरजे और पानी बरसे तो सुखा पड़ेगा और बादल तो गरजे लेकिन पानी न बरसे तो समझ लेना चाहिए की सुकाल रहेगा।
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